kisan sad shayari in hindi
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ये मौसम भी कितनी बेईमान हैं,
बारिश न होने की वजह से मरा इक किसान हैं.
छत टपकती हैं उसके कच्चे मकान की,
फिर भी “बारिश” हो जाये, तमन्ना हैं किसान की.
बारिश न होने की वजह से मरा इक किसान हैं.
छत टपकती हैं उसके कच्चे मकान की,
फिर भी “बारिश” हो जाये, तमन्ना हैं किसान की.
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मैं किसान हूँ 🚶मुझे भरोसा हैं अपने जूनून पर,
निगाहे लगी हुई है👀 आकाश🗯️ के मानसून पर.
मैं किसान हूँ 🚶मुझे भरोसा हैं अपने जूनून पर,
निगाहे लगी हुई है👀 आकाश🗯️ के मानसून पर.
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जो मेरे 🚶गांव के खेतों में 🙏भूख उगने लगी
मेरे किसानों 🚶ने शहरों में नौकरी😣 कर ली
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कोई 😣परेशान हैं सास-बहू 👭के रिश्तो में,
किसान 😣परेशान हैं कर्ज की ⚠️किश्तों में.
किसानो 🚶से अब कहाँ वो 😯मुलाकात करते हैं,
बस रोज नये ख्वाबो🙏 की बात करते हैं.
कोई 😣परेशान हैं सास-बहू 👭के रिश्तो में,
किसान 😣परेशान हैं कर्ज की ⚠️किश्तों में.
किसानो 🚶से अब कहाँ वो 😯मुलाकात करते हैं,
बस रोज नये ख्वाबो🙏 की बात करते हैं.
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धान 🌾के खेतों का सब 🌾सोना किस ने चुराया कौन कहे
बे-मौसम ⚠️बे-फ़स्ल🌾 अभी तक इस इज़हार की धरती है
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खुशहाल 😣नहीं है वो वो 🚶किसान |
जो आबाद🌾 सबको 🙏रखता है ||
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सुना है उसने 👂खरीद लिया है करोड़ों 💸का घर 🏯शहर में
मगर आंगन 🏘️दिखाने आज भी वो👨👩👧👧 बच्चों को 🌾गांव लाता है
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एक बार 👀आकर देख कैसा,
ह्रदय💔 विदारक मंजर हैं,
पसलियों से लग गयी हैं😣 आंतें,
खेत 🌾अभी भी बंजर हैं,
ख़ोल चेहरों पे 💔चढ़ाने नहीं आते हमको
गांव के लोग हैं🏘️ हम शहर में कम 🙏आते हैं
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मेरे🚶 खेत की मिट्टी🌾 से पलता है तेरे शहर 🙆का पेट
मेरा नादान गांव😣 अब भी उलझा है किश्तों में💸
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गाँव🏘️ की आँख 👀से बस्ती की नज़र से देखा 😯
एक ही रंग है 💔दुनिया को जिधर से👀 देखा
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किसानों 🌾से अब कहाँ वो 🙏मुलाकात करते हैं,
बस ऱोज नये 😣ख्वाबों की बात करते हैं
खींच लाता है🏘️ गांव में बड़े 🙏बूढ़ों का आशीर्वाद,
लस्सी, गुड़ के साथ बाजरे 🌾की रोटी का स्वाद
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किसान की राहों में आने वाली बाधाएं दूर होनी चाहिए
कृषि क्षेत्र से जुड़ा हर समस्या दूर होनी चाहिए
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मैं किसान हूं मुझे भरोसा है अपने जुनून पर
निगाहें लगी हुई हैं आकाश के मानसून पर
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किस लालच से किसान आज भी नहीं लेते विश्राम है
घनघोर वर्षा में भी करते निरंतर काम है
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नही हुआ हैं 🌅अभी 🧭सवेरा, पूरब की लाली 🌅पहचान,
चिडियों🦜 के उठने से पहले,💪 खाट छोड़ उठ गया 👳किसान.
नही हुआ हैं 🌅अभी 🧭सवेरा, पूरब की लाली 🌅पहचान,
चिडियों🦜 के उठने से पहले,💪 खाट छोड़ उठ गया 👳किसान.
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कितने अजीब रंग समेटे है ये बेमौसम बारिश खुद में
अमीर पकोड़े खाने , तो किखने जहर खाने की सोच रहा है
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दीवार क्या 🧱गिरी किसान👳 के कच्चे मकान🏘️ की,
नेताओ💂 ने उसके 🧱आँगन में रस्ता 🏃बन दिया.
दीवार क्या 🧱गिरी किसान👳 के कच्चे मकान🏘️ की,
नेताओ💂 ने उसके 🧱आँगन में रस्ता 🏃बन दिया.
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परिश्रम 💪की मिशाल हैं, जिस👳 पर कर्जो ⚠️के निशान🚫 हैं,
घर 🏘️चलाने में खुद👳 को मिटा दिया, और कोई नही वह 👳किसान हैं
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छत 🏘️टपकती हैं उसके कच्चे 🏘️मकान की,
फिर भी “बारिश” 🗯️हो जाये, तमन्ना हैं 👳किसान की.
छत 🏘️टपकती हैं उसके कच्चे 🏘️मकान की,
फिर भी “बारिश” 🗯️हो जाये, तमन्ना हैं 👳किसान की.
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चीर 🌄के जमीन को, 🙏उम्मीद बोता हूं
मै 👳किसान हूं, चैन से👀 कहा सोता हूं
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